मोदीजी, या प्रकरणाकडे लक्ष द्या - जगातील वक्फचा इतिहास आणि वक्फ परिषद आणि राज्य वक्फ बोर्डाचे सध्याचे आकडे. भारत सरकारने मंडळाच्या जमिनींना वैयक्तिक जमीन आणि पैसे म्हणून ताब्यात घेण्यास प्रवृत्त करू नये.
जगातील वक्फ़:चा इतिहास
जगातील वक्फ़:चा इतिहास - (अरबी:وَقْف ; [ˈwɑqf], बहुवचन:औकाफ أَوْقَاف ) जिसे मॉर्टमैन संपत्ति भी कहा
जाता है, इस्लामी कानून (शरियत) के तहत एक अविभाज्य धर्मार्थ बंदोबस्ती है। इसमें आम तौर पर मुस्लिम धार्मिक या
धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए एक इमारत, भूमि का भूखंड या अन्य संपत्ति दान
करना शामिल होता है, जिसमें संपत्ति को पुनः प्राप्त करने
का कोई इरादा नहीं होता है। एक धर्मार्थ ट्रस्ट दान की गई संपत्ति रख सकता है। इस
तरह का समर्पण करने वाले व्यक्ति को वाकिफ ('दाता') के रूप में जाना जाता है, जो राजस्व के एक हिस्से के बदले में संपत्ति का प्रबंधन करने के
लिए मुतवल्ली ('ट्रस्टी') का उपयोग करता है। एक वक्फ राज्य को सांस्कृतिक और
ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में योगदान करते हुए इस्लामी कानून के अनुसार सामाजिक
सेवाएं प्रदान करने की अनुमति देता है। [1][2][3]
इस्लामी ग्रंथों में उत्पत्ति
इस्लाम के
पैग़म्बर मुहम्मद ने वक्फ को बढ़ावा दिया है। हालाँकि वक्फ के
बारे में कोई सीधा कुरआन का आदेश नहीं है
लेकिन सूरह अल-इ-इमरान (3:92) से इसका अनुमान लगाया जा सकता है:
"जब तक आप अपनी प्रिय चीज़ों में से कुछ दान नहीं करते, तब तक आप कभी भी धार्मिकता प्राप्त नहीं कर सकते और जो कुछ भी आप
देते हैं वह निश्चित रूप से अल्लाह को अच्छी तरह से पता है।"[4] इस्लामी समाज में उनकी औपचारिक अवधारणा कई हदीसों से ली गई है। ऐसा
कहा जाता है कि मुहम्मद के समय में, हिजरत के बाद पहला वक्फ 600 खजूर के पेड़ों के एक बाग से बना था। इस वक्फ की आय मदीना के
गरीबों को खिलाने के लिए थी।[5]
एक परंपरा में ऐसा कहा जाता है कि:
"इब्न उमर ने बताया, उमर इब्न अल-खत्ताब को ख़ैबर में ज़मीन मिली वह
मुहम्मद के पास आया और उससे इस बारे में सलाह मांगी। मुहम्मद ने कहा, 'अगर आप चाहें, तो संपत्ति को अविभाज्य बना दें और
इससे होने वाले लाभ को दान में दे दें।' आगे कहा गया है कि उमर ने इसे दान के
रूप में दे दिया ताकि ज़मीन को बेचा, विरासत में या दान में न दिया जाए।
उन्होंने इसे गरीबों, रिश्तेदारों, गुलामों, जिहादियों, यात्रियों और
मेहमानों के लिए दे दिया। अगर कोई व्यक्ति इसकी उपज का कुछ हिस्सा उचित तरीके से
खाता है या किसी ऐसे दोस्त को खिलाता है जो इससे खुद को समृद्ध नहीं बनाता है, तो इसे प्रशासित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ़ नहीं माना जाएगा।"[6]
एक अन्य हदीस में, मुहम्मद ने कहा, "जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके केवल तीन कर्म ही बचे रहते हैं: निरंतर दान, लाभदायक ज्ञान और एक बच्चा उसके लिए प्रार्थना (दुआ) करता है।"[7][8]
भारतीय वक्फ बोर्डाकडे मोठी जमीन मालमत्ता आहे. भारतात वक्फ बोर्ड तिसऱ्या क्रमांकाचे मोठे जमीन मालक आहे, जे संरक्षण मंत्रालय आणि रेल्वेच्या तुलनेत
तिसऱ्या क्रमांकावर आहे. वक्फ बोर्ड 8.7 लाख मालमत्ता व्यवस्थापित करते, ज्यात अंदाजे 9.4 लाख एकर
जमीन आहे, ज्याची किंमत १२ लाख कोटी आहे.
वक्फ बोर्डाचे मुख्य उद्दिष्ट म्हणजे धार्मिक किंवा धर्मादाय
हेतूंसाठी समर्पित असलेल्या मालमत्तेचे व्यवस्थापन आणि संरक्षण करणे. या मालमत्तेचा गैरवापर किंवा गैर-कायदेशीरपणे विक्री होणे रोखणे, तसेच धार्मिक आणि सांस्कृतिक वारसा जपण्यासाठी मदत करणे हे देखील
वक्फ बोर्डाच्या उद्दिष्टांमध्ये समाविष्ट आहे.
वक्फ बोर्डाची उद्दिष्ट्ये:
·
वक्फ मालमत्तेचे व्यवस्थापन:
वक्फ बोर्ड वक्फ
मालमत्तेचे व्यवस्थापन करते, गमावलेल्या मालमत्तेची पुनर्प्राप्ती करते आणि मालमत्तेच्या विक्री, गहाण किंवा भाडेपट्टीसारख्या व्यवहारांना
परवानगी देते, असे Business Standard ने म्हटले आहे.
·
वक्फ मालमत्तेचे संरक्षण:
वक्फ मालमत्तेचे
संरक्षण करणे आणि गैर-कायदेशीर कब्जा किंवा अतिक्रमणापासून संरक्षण करणे हे देखील
वक्फ बोर्डाचे उद्दिष्ट आहे, Central Waqf Council ने सांगितले आहे.
·
वक्फ मालमत्तेच्या वापराचा नियमन:
वक्फ बोर्ड वक्फ
मालमत्तेच्या वापराचा नियमन करते, जेणेकरून ती धार्मिक किंवा धर्मादाय हेतूंसाठी योग्य प्रकारे वापरली जाईल,.
·
वक्फ मालमत्तेची नोंदणी आणि व्यवस्थापन:
वक्फ बोर्ड वक्फ
मालमत्तेची नोंदणी आणि व्यवस्थापन करते, तसेच मालमत्तेच्या संबंधित प्रकरणांवर देखरेख
ठेवते,.
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धार्मिक आणि सांस्कृतिक वारसा जतन:
वक्फ बोर्ड
धार्मिक आणि सांस्कृतिक वारसा जतन करण्यासाठी मदत करते, जसे की धार्मिक स्थळे, ऐतिहासिक इमारती आणि इतर सांस्कृतिक मालमत्ता
यांचे संरक्षण करणे,.
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शिक्षण आणि सामाजिक कल्याण:
वक्फ बोर्ड
शिक्षण आणि सामाजिक कल्याणकारी उपक्रमांना समर्थन देते, तसेच धार्मिक आणि सामाजिक गरजा पूर्ण
करण्यासाठी मदत करते, PWOnlyIAS ने सांगितले आहे.
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वक्फ कायद्याची अंमलबजावणी:
वक्फ बोर्ड वक्फ कायद्याची अंमलबजावणी करते आणि वक्फ संबंधित प्रकरणांवर
कायदेशीर सल्ला देतो,.
वक्फ बोर्डाची भूमिका:
वक्फ बोर्ड हि एक भारत सरकारची कायदेशीर संस्था आहे जी मालमत्ता प्राप्त करू
शकते, धारण करू शकते आणि हस्तांतरित करू
शकते, Business Standard नुसार. वक्फ बोर्ड वक्फ
मालमत्तेचे व्यवस्थापन करते,
गमावलेल्या मालमत्तेची पुनर्प्राप्ती
करते आणि मालमत्तेच्या विक्री,
गहाण किंवा भाडेपट्टीसारख्या
व्यवहारांना परवानगी देते,.सध्या भारत सरकारने वक्फ परिषद जिचा
अध्यक्षी अल्प्संख्यंक मंत्रालयाचा मंत्री या वक्फ परिषदेचा अध्यक्ष असतो आणि २०
सदस्य असतात यात सदर २० सदस्य हे कोणत्याही जाती दर्माचे आणि सामाजिक कार्याला
वाहिलेले असतात आणि यांच्या सल्ल्याने आणि क्याबिनट मंत्रिमंडळ पंतप्रधान आणि
राष्ट्रपती यांच्या सल्ल्याने राज्य वक्फ बोर्डाची निर्मिती करतात आणि आज मितीला
सबंध भारत वर्षात ३० राज्य वक्फ बोर्ड आहेत
एकंदरीत वक्फ बोर्डास देणगी स्वरुपात समर्पित झालेल्या जमिनी ची वाद सबंधित तहसील
मध्ये सुरु आहेत तसेच वक्फ बोर्ड संचलित शला महाविद्यालये दवाखने इत्यादींचे हि
वाद सबंधित धर्मादाय आयुक्त कडे वाद सुरु आहेत तसेच वक्फ बोर्डाने भाडे करार
पत्यावर दिलेल्या जमिनीचे हि वाद शासन दरबारी सुरु आहेत वक्फ बोर्डास मिळणारे
अर्थीक उत्त्पन्न आणि परिषदेस आणि बोर्डास
मिळालेल्या आंतरराष्ट्रीय निधी यांचेही वाद सुरु आहेत आणि सदर अर्थाचे भारताच्या
महालेखापाल यांचे कडून कित्येक वर्षापासून लेखा परीक्षण झालेले नाही परिषदेने आणि राज्य
बोर्डाने देशातील शिक्षण संस्थाना जमिनी नाममात्र भाडे तत्वावर शाळा महाविद्यालये
आणि दवाखने च्ल्विन्या करिता दिल्या आहेत आणि आज मितीला परिषदेकडे आणि बोर्डाकडे
खूप थोडी जमीन शिल्लक आहे आणि तीही मालकीच्या वादातीठ आहे थोडक्यात सर्वच बाजूने द्ब्घैस आलेले आहे .आणि
कित्येक जमिनी वर राष्ट्रीयकृत बँकाची कर्जे आहेत
भारत मे १९१३,
१९२३, १९३०, १९५४ ,१९६९ १९८४ ,१९९५ ,२०१३ वक्फ कानून मे वक्फ संशोधन विधेयक, २०२५
भारत में वक्फ का
इतिहास
'वक्फ' को मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए किसी भी चल या अचल संपत्ति के किसी भी व्यक्ति द्वारा स्थायी समर्पण के रूप में परिभाषित किया गया है।[1]
परिचय
भारत में वक्फ कानून का विकास वक्फ संपत्तियों को विनियमित और संरक्षित करने के चल रहे प्रयासों को दर्शाता है, जो महत्वपूर्ण सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। 1954 के वक्फ अधिनियम से शुरू होकर, वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में उभरती चुनौतियों का समाधान करने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए वर्षों में कई संशोधन हुए हैं। हाल ही में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, शासन संरचनाओं में सुधार करना और वक्फ संपत्तियों को दुरुपयोग से बचाना है। इन कानूनी सुधारों ने वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को आकार दिया है और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया है।
भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन वर्तमान में वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा शासित है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित और विनियमित किया जाता है। वक्फ प्रबंधन में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकायों में शामिल हैं:
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केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी) – अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के तहत एक २० स्द्स्यो कि सलाहकार परिषद होती है जिसका
अध्यक्ष अल्प्संख्यंक मंत्रालय के मंत्री होते है निकाय जो देश भर में वक्फ प्रशासन पर मार्गदर्शन और निरीक्षण प्रदान करता है। इसका वक्फ संपत्तियों पर सीधा नियंत्रण नहीं है, लेकिन नीतिगत मामलों पर सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को सलाह देता है।
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राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) – ये बोर्ड वक्फ संपत्तियों के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं और वक्फ अधिनियम के अनुसार उनके प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग के लिए जिम्मेदार हैं। प्रत्येक राज्य का अपना वक्फ बोर्ड होता है, जो अपने अधिकार क्षेत्र में वक्फ संपत्तियों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है।
·
वक्फ ट्रिब्यूनल – वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों, प्रश्नों और अन्य मामलों के निर्धारण के लिए स्थापित विशेष न्यायिक निकाय।
यह संरचित प्रशासनिक सेटअप वक्फ संपत्तियों के बेहतर शासन को सुनिश्चित करता है और वक्फ से संबंधित विवादों के त्वरित समाधान की सुविधा प्रदान करता है, जिससे प्रणाली अधिक कुशल और पारदर्शी हो जाती है।
वर्षों से, वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करने वाला भारत का कानूनी और प्रशासनिक ढांचा पारदर्शिता, दक्षता और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विधायी अधिनियमों के माध्यम से विकसित हुआ है।
भारत में वक्फ इतिहास का अवलोकन
भारत में वक्फ संपत्तियों के शासन को प्रशासन में सुधार और कुप्रबंधन को रोकने के उद्देश्य से कई विधायी अधिनियमों के माध्यम से विनियमित किया गया है:
- मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम, 1913: इस अधिनियम ने मुसलमानों के अपने परिवारों और वंशजों के लाभ के लिए वक्फ बनाने के अधिकार को स्पष्ट और पुष्टि की, जिसमें अंतिम धर्मार्थ उद्देश्य शामिल हैं:
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वक्फ प्रबंधन को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने का उद्देश्य।
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तथापि, अधिनियम के कार्यान्वयन के दौरान यह महसूस किया गया कि यह अधिनियम वक्फ के प्रशासन में सुधार करने में कारगर सिद्ध नहीं हुआ।
- मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923: वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में उचित लेखांकन और पारदर्शिता सुनिश्चित करके उनके प्रबंधन में सुधार के लिए पेश किया गया।
- मुसलमान वक्फ विधिमान्य अधिनियम, 1930: इसने 1913 के अधिनियम को पूर्वव्यापी प्रभाव प्रदान किया, जिससे पारिवारिक वक्फ की कानूनी वैधता को बल मिला।
- वक्फ अधिनियम, 1954: वक्फ संपत्तियों के व्यवस्थित प्रशासन, पर्यवेक्षण और संरक्षण के लिए पहली बार राज्य वक्फ बोर्डों (एसडब्ल्यूबी) की स्थापना की गई:
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आजादी के बाद ही वक्फ को मजबूत किया गया है।
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1954 के वक्फ अधिनियम ने वक्फ के केंद्रीकरण की दिशा में एक मार्ग प्रदान किया।
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सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया, एक वैधानिक निकाय 1964 में भारत सरकार द्वारा 1954 के इस वक्फ अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था।
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यह केंद्रीय निकाय विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करता है जिन्हें वक्फ अधिनियम,
1954 की धारा 9 (1) के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
- वक्फ अधिनियम, 1954 (1959, 1964, 1969 और 1984) में संशोधन: इन संशोधनों का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में और सुधार करना था।
- वक्फ अधिनियम, 1995: इस व्यापक अधिनियम ने वर्ष 1954 के अधिनियम और इसके संशोधनों को निरस्त कर दिया:
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वक्फ अधिनियम,
1995 को भारत में वक्फ संपत्तियों (धार्मिक बंदोबस्ती) के प्रशासन को नियंत्रित करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
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यह वक्फ परिषद, राज्य वक्फ बोर्डों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शक्ति और कार्यों के साथ-साथ मुतवल्ली के कर्तव्यों का भी प्रावधान करता है।
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यह अधिनियम एक वक्फ ट्रिब्यूनल की शक्ति और प्रतिबंधों का भी वर्णन करता है जो अपने अधिकार क्षेत्र के तहत एक सिविल कोर्ट के बदले कार्य करता है।
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एक ट्रिब्यूनल का निर्णय पार्टियों पर अंतिम और बाध्यकारी होगा. कोई मुकदमा या कानूनी कार्यवाही किसी भी सिविल कोर्ट के तहत नहीं होगी। इस प्रकार, वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को किसी भी सिविल कोर्ट से ऊपर बनाया गया ।
- वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2013 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
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तीन सदस्यीय वक्फ ट्रिब्यूनल का गठन, जिसमें मुस्लिम कानून और न्यायशास्त्र का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति शामिल है।
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राज्य वक्फ बोर्डों में दो महिला सदस्यों को शामिल करना।
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वक्फ संपत्तियों की बिक्री और उपहार पर प्रतिबंध, अलगाव की गुंजाइश को कम करना।
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वक्फ संपत्तियों के लिए लीज अवधि 3 साल से बढ़ाकर 30 साल करना, बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025, और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024
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प्रस्तावित विधेयक वक्फ प्रशासन का आधुनिकीकरण करने, मुकदमेबाजी को कम करने और वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक व्यापक विधायी प्रयास है।
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प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य वक्फ अधिनियम,
1995 की कमियों को दूर करना और 2013 (संशोधन) अधिनियम द्वारा पेश की गई विसंगतियों को दूर करना है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा योजनाएं
कौमी वक्फ बोर्ड तरक्कियाती योजना (क्यूडब्ल्यूबीटीएस) और शहरी वक्फ सम्पत्ति विकास योजना (एसडब्ल्यूएसवीवाई) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (एमओएमए), भारत सरकार के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। ये दो योजनाएं राज्य वक्फ बोर्डों के स्वचालन और आधुनिकीकरण के लिए हैं।
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क्यूडब्ल्यूबीटीएस के अंतर्गत, वक्फ संपत्तियों के अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटीकरण के लिए जनशक्ति की तैनाती और वक्फ बोर्डों के प्रशासन को बेहतर करने के लिए सीडब्ल्यूसी के माध्यम से राज्य वक्फ बोर्डों को सरकारी सहायता अनुदान (जीआईए) प्रदान किया जाता है।
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एसडब्ल्यूएसवीवाई के अंतर्गत, वक्फ संपत्तियों पर वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं विकसित करने के लिए वक्फ बोर्डों/वक्फ संस्थाओं को ब्याज मुक्त ऋणों के आगे संवितरण के लिए केन्द्रीय वक्फ बोर्ड को अनुदान प्रदान किया जाता है।
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2019-20 से 2023-24 तक क्यूडब्ल्यूबीटीएस और एसडब्ल्यूएसवीवाई के तहत क्रमशः 23.87 करोड़ रुपये और 7.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
भारत में वक्फ संपत्तियों का अवलोकन :
WAMSI पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, 30 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों और 32 बोर्डों ने रिपोर्ट किया है कि वहां 8.72 लाख संपत्तियां हैं, जो 38 लाख एकड़ से अधिक भूभाग को कवर करती हैं। 8.72 लाख संपत्तियों में से 4.02 लाख उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ हैं। शेष वक्फ संपत्तियों के लिए, स्वामित्व अधिकार स्थापित करने वाले दस्तावेज़
(डीड्स) WAMSI पोर्टल पर 9279 मामलों के लिए अपलोड किए गए हैं और केवल 1083 वक्फ डीड अपलोड किए गए हैं।
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2084716
(14 मार्च, 2025 के अनुसार)
सितंबर 2024 तक राज्यवार वक्फ संपत्तियों की संख्या और क्षेत्र का डेटा
निष्कर्ष
1913 से 2024 तक भारत में वक्फ कानून का विकास समाज के लाभ के लिए वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और विनियमन के साथ-साथ एक प्रभावी प्रशासन प्रणाली होने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालता है। प्रत्येक विधायी सुधार ने वक्फ बंदोबस्ती के मूल सिद्धांतों को बनाए रखते हुए समकालीन चुनौतियों का समाधान करने की मांग की है। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।
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